दिल्ली चुनाव के घोषणापत्रों में न्याय क्षेत्र की अनदेखी
न्याय व्यवस्था को लेकर आमतौर पर कम ही चर्चा होती है। जनता की ओर से मांग न होने पर राजनीतिक दल भी चुनावी घोषणापत्रों में न्याय व्यवस्था के मुद्दों को नज़रअंदाज़ कर देते हैं।
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अपनी ज़िम्मेदारी से पीछे हटते उपभोक्ता आयोग
राज्य और ज़िला उपभोक्ता आयोगों में ख़ाली पदों और लंबित मामलों ने उपभोक्ता न्याय व्यवस्था पर लोगों का भरोसा कमज़ोर कर दिया है।
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एक दिन बिताने से जेल की समस्याएं समझ नहीं आएगी
भारत की जेलों की हालत चिंताजनक है। हमारी जेलें एक लापरवाह और असफल न्याय व्यवस्था का बोझ उठा रही हैं।
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अपराध में शामिल किशोरों के पुनर्वास के लिए कितने तैयार हैं हम?
देश भर में हर वर्ष हज़ारों की संख्या में किशोरों को निरुद्ध किया जाता है। उनकी देखरेख के लिए केवल 197 परिवीक्षा अधिकारी हैं।